सुबह की पहली किरण, कलश में है समाई
तेरे नाम की ज्योत, दिल में है जलाई
ढोल की धमक में, धड़कनें ये कहती हैं
तेरे होने से ही, ये सांसे चलती हैं
गहनों से सजी, मैं तेरे द्वार आई हूँ
खुशियों की सौगात, साथ में लाई हूँ
सांसों की सरगम, कदम डगमगाते हैं
तुझे पाने की चाह में, गीत गुनगुनाते हैं
पूजा की वेदी पे, प्रेम का दीप जला है
तेरे आने से ही, मन का ये आंगन खिला है
पूजा की थाली में, मेरा प्यार है सजा
फूलों की माला में, छिपा है मेरा रज़ा
तुझपे ही अर्पण, ये जीवन ये प्राण हैं
तू ही मेरा संगीत, तू ही मेरी शान है
मेरे प्रेम का समर्पण, तुझपे ही लुटाना है
इस जन्मो-जन्म के रिश्ते को, निभाना है
वीणा के तारों में, तेरा नाम गूंजता है
साजों की महफिल में, तेरा ही नूर चमकता है
मोर पंख का पंखा, हवाओं को महकाए
तेरे आने की आहट, मन में खुशियां फैलाए
तू जो पास हो, तो हर पल त्यौहार लगे
तेरी परछाई में, मुझे अपना संसार लगे
सांसों की सरगम, कदम डगमगाते हैं
तुझे पाने की चाह में, गीत गुनगुनाते हैं
पूजा की वेदी पे, प्रेम का दीप जला है
तेरे आने से ही, मन का ये आंगन खिला है
पूजा की थाली में, मेरा प्यार है सजा
फूलों की माला में, छिपा है मेरा रज़ा
तुझपे ही अर्पण, ये जीवन ये प्राण हैं
तू ही मेरा संगीत, तू ही मेरी शान है
मेरे प्रेम का समर्पण, तुझपे ही लुटाना है
इस जन्मो-जन्म के रिश्ते को, निभाना है
ढोल बजे जोर से, दिल की ये पुकार है
कलश का ये अमृत, जैसे तेरा प्यार है
नजदीकियां बढ़ें, तो धड़कन भी बढ़ जाए
ये रूहानी मिलन, खुदा खुद ही कराए
पूजा की थाली में, मेरा प्यार है सजा!
फूलों की माला में, छिपा है मेरा रज़ा!
तुझपे ही अर्पण, ये जीवन ये प्राण हैं!
तू ही मेरा संगीत, तू ही मेरी शान है!
वीणा के तार शांत हुए
ढोल की थाप धीमी पड़ गई
कलश का जल स्थिर हुआ
मोर पंख की हवाएं रुक गईं
अब बस,, तुम्हारा ही नाम बाकी है