Prakriti Ka Meetha Saath

Aaradhya Hotri

प्रकृति मुझे पास बुलाए
दिल में मीठी शांति लाए
हर पत्ता जैसे गीत सुनाए
धरती प्यार से गले लगाए

सुबह का सूरज रंग बिखेर
धीरे-धीरे दिन को घेर
हल्की हवा ये बात बताए
आज नया सपना मुस्काए

नदियाँ मीठे गीत सुनाए
लहरें धीरे पास बुलाए
पर्वत चुप से खड़े रह
फिर भी मन से बात कर

फूलों पर ओस चमकती जाए
सुबह की किरण उसे सजाए
चिड़ियाँ प्यारी बोली बोल
दिल के बंद दरवाज़े खोल

नीले आसमान की बाहों म
मन खो जाए राहों म
सारे ग़म अब दूर चल
खुशी के छोटे फूल खिल

प्रकृति मुझे पास बुलाए
दिल में मीठी शांति लाए
हर पत्ता जैसे गीत सुनाए
धरती प्यार से गले लगाए

हरियाली में दिल खिल जाए
थका हुआ मन चैन पाए
मिट्टी की खुशबू साथ चल
सपनों के दीपक फिर से जल

शांत हवाएँ छूकर जाए
मन को मीठा सुकून दिलाए
पेड़ भी जैसे बोल रह
जीवन के रंग खोल रह

इस सुंदर सी दुनिया म
प्रेम छुपा है हर कण म
जो दिल से इसको सुन ल
वो दुख को पीछे छोड़ द

रात में तारे चमक दिखाए
चाँद भी नरम उजाला लाए
धरती सोए शांत सी होकर
मन जागे सपनों को लेकर

सुबह फिर से गीत सुनाए
नई उम्मीदें साथ में लाए
प्रकृति ही सच्चा साथी बन
दिल में प्यारा उजाला जग

प्रकृति मुझे पास बुलाए
दिल में मीठी शांति लाए
हर पत्ता जैसे गीत सुनाए
धरती प्यार से गले लगाए

सुबह का सूरज रंग बिखेर
हल्की हवा ये गीत कह
प्रकृति ही सच्चा गीत बन
दिल में प्यार हमेशा रह


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